सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · आस्था से अध्यात्म तक सात्विक जीवन · स्वस्थ समाज · समृद्ध भारत
आध्यात्मिक लेख

गीता में योग: तीनों योगों से निर्वाण पद की प्राप्ति

संहिता शास्त्री गर्गाचार्य श्री अर्जुन प्रसाद बस्तौला जी

गीता में ‘योग’ शब्द के बड़े विचित्र-विचित्र अर्थ हैं। उनके हम तीन विभाग कर सकते हैं।

इस लेख में

  • ‘योग’ शब्द के तीन अर्थ
  • पातंजल योगदर्शन: चित्तवृत्तियों का निरोध
  • तीनों योगों से निर्वाण पद की प्राप्ति
  • तीनों योगों से कर्मों (पापों) का नाश: कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग
गीता में योग: तीनों योगों से निर्वाण पद की प्राप्ति