गीता में ‘योग’ शब्द के बड़े विचित्र-विचित्र अर्थ हैं। उनके हम तीन विभाग कर सकते हैं।
इस लेख में
- ‘योग’ शब्द के तीन अर्थ
- पातंजल योगदर्शन: चित्तवृत्तियों का निरोध
- तीनों योगों से निर्वाण पद की प्राप्ति
- तीनों योगों से कर्मों (पापों) का नाश: कर्मयोग, ज्ञानयोग, भक्तियोग

