सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 · आस्था से अध्यात्म तक सात्विक जीवन · स्वस्थ समाज · समृद्ध भारत
विषय

आध्यात्मिक लेख

गीता, उपनिषद, स्तोत्र और आचार्यों की वाणी का सरल अर्थ।

श्री आद्य शंकराचार्य लीलामृत

अच्छे आचरण से बनता है उज्ज्वल चरित्र

काशी में गंगा-स्नान के बाद चाण्डाल वेशधारी भगवान विश्वनाथ से भेंट, और वे पाँच श्लोक जो "मनीषा पञ्चकम्" के नाम से प्रसिद्ध हैं, हिंदी अनुवाद सहित।

गरुड़ पुराणोक्त पितृपक्ष परान्न निषेध कथा

पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए।

अन्न के 3 दोष, पितृपक्ष का सूक्ष्म विज्ञान, दूसरों के घर न खाने के कारण, आहार विधान और अपवाद, गरुड़ पुराण के अनुसार।

शिव मानस पूजा

मन से भगवान की पूजा

आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा रचित श्री शिव मानस पूजा स्तोत्र। मानस पूजा की महिमा, उसका स्वरूप और लाभ।

संत संग का अमूल्य वरदान

संत का मिलना ही बड़ा दुर्लभ है, पर यदि वे मिल गये तो काम बन गया।

सत्संग के बिखरे मोती, (गीता प्रेस) नाम की पुस्तक से साभार।

साधनपञ्चकम्: आध्यात्मिक साधना के 40 अमूल्य निर्देश

आदि शंकराचार्य रचित पाँच श्लोक, सरल हिंदी अर्थ के साथ। कर्तव्य से आत्मज्ञान तक का सम्पूर्ण मार्ग।

गीता में योग: तीनों योगों से निर्वाण पद की प्राप्ति

गीता में 'योग' शब्द के तीन अर्थ, पातंजल योगदर्शन का चित्तवृत्ति निरोध, और कर्मयोग, ज्ञानयोग व भक्तियोग से कर्मों (पापों) का नाश।