सात्विकम् आहार
सात्विक भोजन सेवा। तीर्थों, पर्वों और सेवा-शिविरों में जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक भोजन।
हर सेवा की तस्वीरें @thesatwikam परगुरुकुलों की परंपरा, तीर्थों की महिमा, संतों का सान्निध्य और सात्विक सेवा। सात्विकम् भारत की इसी जीवित धरोहर को हर घर तक पहुँचाने का प्रयास है।





भोजन सेवा से संस्कार तक। हर सेवा सात्विक विधि और शास्त्रीय परंपरा के अनुसार।
सात्विक भोजन सेवा। तीर्थों, पर्वों और सेवा-शिविरों में जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक भोजन।
हर सेवा की तस्वीरें @thesatwikam परभारत के श्रेष्ठ 108 गुरुकुलों को एक मंच पर लाना, और वैदिक शिक्षा को सहयोग।
भारत के गुरुकुल →वैदिक विधि से विवाह संस्कार, सात्विक भोजन और परंपरागत आयोजन।
विस्तार से →केदारनाथ, बद्रीनाथ, वृंदावन, काशी और मुक्तिनाथ जैसे धामों की तीर्थ यात्राएँ।
शास्त्रीय विधि से संस्कार, योग्य आचार्यों द्वारा।
विवाह, यज्ञोपवीत, अंतिम संस्कार, भोजन सेवा या तीर्थ यात्रा। अपनी आवश्यकता बताएँ, सात्विकम् की टीम आपसे संपर्क करेगी।
देश के श्रेष्ठ 108 गुरुकुल, चाहे वे महाराष्ट्र में हों, काशी में या किसी और कोने में। हर गुरुकुल की परंपरा, आचार्य, शिक्षा-पद्धति और संपर्क, एक ही स्थान पर। सूची धीरे-धीरे जुड़ती जाएगी।
पहले गुरुकुल शीघ्र सूचीबद्ध होंगे।
30 वर्ष या उससे कम आयु के वे युवा संत, जिनकी साधना, अध्ययन और सेवा समाज को दिशा दे रही है। सात्विकम् उनकी भूमिका को सामने लाएगा, ताकि वे आगे बढ़ें और नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले।
उनका नाम, आयु और सेवा-कार्य हमें बताएँ। सात्विकम् टीम परिचय तैयार करेगी।
आध्यात्मिक लेख
अच्छे आचरण से बनता है उज्ज्वल चरित्र
काशी में गंगा-स्नान के बाद चाण्डाल वेशधारी भगवान विश्वनाथ से भेंट, और वे पाँच श्लोक जो "मनीषा पञ्चकम्" के नाम से प्रसिद्ध हैं, हिंदी अनुवाद सहित।
आयोजन व स्मरण
भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण, शिक्षा, महिला-जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन की महान अग्रदूत। सेंट्रल हिन्दू कॉलेज (1898) से वसंत कॉलेज फॉर विमेन (1913) तक उनका योगदान।
आयोजन व स्मरण
ज्ञान, साधना और संस्कृति का भव्य उत्सव
10 से 21 अक्टूबर तक गुरुग्राम में विशेष आयोजन। 26 अक्टूबर को शाकम्भरी देवी रूप में होगा अलंकरण।
पर्व-उत्सव
श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान, पितरों की तृप्ति का मार्ग। पितृपक्ष का महत्व, पितृ तर्पण की विधि, श्राद्ध में क्या करें और क्या न करें।
आध्यात्मिक लेख
पितृपक्ष के दौरान किसी के घर अन्न-जल क्यों नहीं ग्रहण करना चाहिए।
अन्न के 3 दोष, पितृपक्ष का सूक्ष्म विज्ञान, दूसरों के घर न खाने के कारण, आहार विधान और अपवाद, गरुड़ पुराण के अनुसार।
पर्व-उत्सव
अनंत भगवान की शरण और श्रद्धा की अमर कथा
शीला ने बांधा अनंत-सूत्र, कौण्डिन्य ने किया अपमान। चौदह गांठों में छिपा है अनंत का संदेश: धागा नहीं, धर्म और संकल्प का बंधन है यह सूत्र।
पर्व-उत्सव
अनन्त चतुर्दशी का परिचय, पौराणिक महत्व, कथा, पूजा-विधि, अनन्तसूत्र का महत्व और आध्यात्मिक संदेश।
आध्यात्मिक लेख
मन से भगवान की पूजा
आदि गुरु शंकराचार्य जी द्वारा रचित श्री शिव मानस पूजा स्तोत्र। मानस पूजा की महिमा, उसका स्वरूप और लाभ।
वेद, विज्ञान व इतिहास
सम्पूर्ण सृष्टि अग्नि और सोम के संयोग से उत्पन्न है।
पूज्य धर्मसम्राट श्री करपात्री जी महाराज के विचार: चन्द्र मन का अधिष्ठाता, दृष्ट चन्द्र और सूक्ष्म चन्द्रलोक, वैदिक सिद्धान्त और आधुनिक चंद्रयान।
आध्यात्मिक लेख
संत का मिलना ही बड़ा दुर्लभ है, पर यदि वे मिल गये तो काम बन गया।
सत्संग के बिखरे मोती, (गीता प्रेस) नाम की पुस्तक से साभार।
ऋषि-परंपरा व भक्ति
तप, ज्ञान और करुणा के प्रतीक
परिचय और उत्पत्ति, सती अनसूया और अत्रि का वैवाहिक जीवन, वैदिक और वैज्ञानिक योगदान, रामायण में उल्लेख, और श्री अत्रि कृत श्रीराम स्तुति।
वेद, विज्ञान व इतिहास
वायु पुराण (अध्याय ३८), भागवत पुराण, विष्णु पुराण और इन्द्रविजय पुस्तक के अनुसार भारत के निकटवर्ती द्वीप, खण्ड और उनके आज के नाम।
पर्व-उत्सव
ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 22वें सूक्त (मन्त्र 16–21) में वामनरूपधारी विष्णु का स्तवन, सविस्तार अर्थ और पूजा-व्रत की विधि।
वेद, विज्ञान व इतिहास
महामृत्युंजय मंत्र के हर शब्द में छिपा विज्ञान: नब्ज़ की उल्टी गिनती, शुक्राचार्य की संजीवनी, 33 अक्षरों का महाकोड और डीएनए की सफ़ाई।
ऋषि-परंपरा व भक्ति
चरण-चिह्नों में समाया है धर्म, मर्यादा, करुणा और भक्ति का संदेश। कमल, चक्र, शंख, ध्वजा, वज्र, अंकुश और हर चिन्ह का अर्थ।
आध्यात्मिक लेख
आदि शंकराचार्य रचित पाँच श्लोक, सरल हिंदी अर्थ के साथ। कर्तव्य से आत्मज्ञान तक का सम्पूर्ण मार्ग।
आध्यात्मिक लेख
गीता में 'योग' शब्द के तीन अर्थ, पातंजल योगदर्शन का चित्तवृत्ति निरोध, और कर्मयोग, ज्ञानयोग व भक्तियोग से कर्मों (पापों) का नाश।
पर्व-उत्सव
भाद्रपद शुक्ल पक्ष पंचमी, ऋषियों के स्मरण का दिवस। सप्तर्षि मंत्र, चिरंजीवी ऋषि लोमश, गर्गाचार्य, मार्कंडेय और हम क्या सीखें।
तीर्थ परिचय
सृष्टि और जम्बूद्वीप, शालिग्राम की उत्पत्ति, दामोदर कुंड और काकवेणी, गंडकी की पवित्रता।
तीर्थ परिचय
सह्याद्रि शिखर नामक अत्यन्त अद्भुत पर्वत, जहाँ कोशल नायक श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी सहित शयन करते हैं।
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥
महामृत्युंजय मंत्र · ऋग्वेद 7.59.12
हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव का पूजन करते हैं, जो सुगंधित हैं और जीवन का पोषण करते हैं। जैसे पका फल बेल के बंधन से सहज अलग हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।
कश्यपोऽत्रिर्भरद्वाजो विश्वामित्रोऽथ गौतमः।
जमदग्निर्वसिष्ठश्च सप्तैते ऋषयः स्मृताः॥
सप्तर्षि मंत्र · ऋषि पंचमी
कश्यप, अत्रि, भरद्वाज, विश्वामित्र, गौतम, जमदग्नि और वशिष्ठ। ये सात ऋषि स्मरण किए जाते हैं। इन्हें सप्तर्षि कहा जाता है।
अग्नीषोमात्मकं जगत्
पूज्य धर्मसम्राट श्री करपात्री जी महाराज
सम्पूर्ण सृष्टि अग्नि और सोम के संयोग से उत्पन्न है। सम्पूर्ण जगत में दो ही मूलतत्व हैं: अग्नि (शक्ति, ऊर्जा, पुरुष) और सोम (रस, भाव, प्रकृति)।
तद्विष्णोः परमं पदं सदा पश्यन्ति सूरयः।
दिवीव चक्षुराततम्॥
ऋग्वेद 1.22.20 · वामन स्तवन
भगवान विष्णु के उस परम पद (सर्वोच्च धाम) को ज्ञानी और विद्वान पुरुष सदा अपने अंतःकरण में उसी प्रकार साक्षात् देखते हैं, जैसे आकाश में खुली आँखें सूर्य को सर्वत्र देखती हैं।
पढ़ना, बोलना और लिखना सीखने के छोटे-छोटे संस्कार। घर पर बच्चों के साथ पढ़ें।
ऐसे पढ़ो, सही तरीका: सीधे बैठकर पढ़ो। पुस्तक नेत्रोंसे हाथ भर दूर रखकर पढ़ो। साधारण प्रकाशमें पढ़ो।
बालकों की बोल-चाल, पृष्ठ 12, 13 (गीता प्रेस) पुस्तक से साभार
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बोलना सीखना पड़ता है। बोलने का ढंग होता है। बोलने के नियम होते हैं। उचित रूप से बोलने वाला सम्मानित होता है।
बहुत झुककर लिखते हो? अच्छा नहीं। घसीटकर लिखते हो? अच्छा नहीं। टेढ़ी लाइनें लिखते हो? अच्छा नहीं।
"बालकों की बोल-चाल" (गीता प्रेस) पुस्तक से साभार · संकलन: अजय कुमार मिश्र
हर लेख का वीडियो रूप। श्लोकों का पाठ, कथा और गर्गाचार्य जी का प्रवचन।
हर धाम की पौराणिक कथा, उसका भूगोल और उससे जुड़ी परंपराएँ।

सती वृन्दा के श्राप से मुक्ति होने के लिए भगवान विष्णु गंडकी नदी में शिला रूप में प्रकट हुए थे। सर्वलोक पाप विनाश के लिए भगवान विष्णु शालिग्राम शिला रूप में प्रतिष्ठित हुए।

यह सह्याद्रि शिखर नामक पर्वत अत्यन्त अद्भुत है। इसी पर्वत पर कोशल नायक श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण जी सहित शयन करते हैं।

ऋषि पंचमी का पर्व अपने ऋषियों को स्मरण करने का एक पावन दिन है। इसी दिन हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हर कल्प के सप्तर्षि कल्प भर हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं।ऋषि पंचमी पर गर्गाचार्य जी का कथन
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