मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 · आस्था से अध्यात्म तक सात्विक जीवन · स्वस्थ समाज · समृद्ध भारत
— भारतीय ज्ञान परम्परा की लोकमंगल यात्रा —

आस्था, संस्कृति, सद्भाव से समाज कल्याण

गुरुकुलों की परंपरा, तीर्थों की महिमा, संतों का सान्निध्य और सात्विक सेवा। सात्विकम् भारत की इसी जीवित धरोहर को हर घर तक पहुँचाने का प्रयास है।

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केदारनाथ धाम
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ऋषि-परंपरा · गुरुकुल
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सात्विकम् सेवाएँ

सेवा ही साधना

भोजन सेवा से संस्कार तक। हर सेवा सात्विक विधि और शास्त्रीय परंपरा के अनुसार।

SATWIKAM AAHAAR

सात्विकम् आहार

सात्विक भोजन सेवा। तीर्थों, पर्वों और सेवा-शिविरों में जरूरतमंदों और श्रद्धालुओं को प्रेमपूर्वक भोजन।

हर सेवा की तस्वीरें @thesatwikam पर
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विवाह, यज्ञोपवीत, अंतिम संस्कार, भोजन सेवा या तीर्थ यात्रा। अपनी आवश्यकता बताएँ, सात्विकम् की टीम आपसे संपर्क करेगी।

108गुरुकुलएक-एक मनका, एक-एक गुरुकुल
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भारत के गुरुकुल

BHARAT KE GURUKUL

देश के श्रेष्ठ 108 गुरुकुल, चाहे वे महाराष्ट्र में हों, काशी में या किसी और कोने में। हर गुरुकुल की परंपरा, आचार्य, शिक्षा-पद्धति और संपर्क, एक ही स्थान पर। सूची धीरे-धीरे जुड़ती जाएगी।

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नई श्रृंखला

भविष्य के संत

30 वर्ष या उससे कम आयु के वे युवा संत, जिनकी साधना, अध्ययन और सेवा समाज को दिशा दे रही है। सात्विकम् उनकी भूमिका को सामने लाएगा, ताकि वे आगे बढ़ें और नई पीढ़ी उनसे प्रेरणा ले।

≤ 30वर्ष आयु

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उनका नाम, आयु और सेवा-कार्य हमें बताएँ। सात्विकम् टीम परिचय तैयार करेगी।

आयु 30 वर्ष या कमनियमित साधना व अध्ययनसमाज-सेवा में सक्रिय भूमिकागुरु-परंपरा से जुड़ाव
लेख-संग्रह

नवीनतम लेख

श्री आद्य शंकराचार्य लीलामृत

अच्छे आचरण से बनता है उज्ज्वल चरित्र

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डॉ. एनी बेसेंट की जयंती पर शत्-शत् नमन

भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण, शिक्षा, महिला-जागरण और स्वतंत्रता आंदोलन की महान अग्रदूत। सेंट्रल हिन्दू कॉलेज (1898) से वसंत कॉलेज फॉर विमेन (1913) तक उनका योगदान।

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10 से 21 अक्टूबर तक गुरुग्राम में विशेष आयोजन। 26 अक्टूबर को शाकम्भरी देवी रूप में होगा अलंकरण।

पितृपक्ष पर विशेष: पितरों की तृप्ति खोलती है समृद्धि के द्वार

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आज का श्लोक

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उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

महामृत्युंजय मंत्र · ऋग्वेद 7.59.12

हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव का पूजन करते हैं, जो सुगंधित हैं और जीवन का पोषण करते हैं। जैसे पका फल बेल के बंधन से सहज अलग हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, अमृत से नहीं।

बच्चों के लिए

सात्विकम् संस्कारशाला

पढ़ना, बोलना और लिखना सीखने के छोटे-छोटे संस्कार। घर पर बच्चों के साथ पढ़ें।

पढ़ना सीखो

ऐसे पढ़ो, सही तरीका: सीधे बैठकर पढ़ो। पुस्तक नेत्रोंसे हाथ भर दूर रखकर पढ़ो। साधारण प्रकाशमें पढ़ो।

  • जो कुछ पढ़ो, समझकर पढ़ो।
  • जितना पढ़ो, स्मरण रखो।
  • वही पढ़ो, जो पाठशालामें या जीवनमें काम दें।

बालकों की बोल-चाल, पृष्ठ 12, 13 (गीता प्रेस) पुस्तक से साभार

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बोलना सीखो

बोलना सीखना पड़ता है। बोलने का ढंग होता है। बोलने के नियम होते हैं। उचित रूप से बोलने वाला सम्मानित होता है।

  • नम्रता से बोलना सीखो।
  • मधुरता से बोलना सीखो।
  • विनय पूर्वक बोलना सीखो।
  • शिष्टता से बोलना सीखो।
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लिखना सीखो (1) और (2)

बहुत झुककर लिखते हो? अच्छा नहीं। घसीटकर लिखते हो? अच्छा नहीं। टेढ़ी लाइनें लिखते हो? अच्छा नहीं।

  • सुनकर लिखना, समझकर लिखना,
  • साफ-साफ लिखना, शुद्ध-शुद्ध लिखना,
  • सोचकर लिखना। जानकर लिखना।
  • अलग-अलग लिखना। सुन्दर अक्षर लिखना।
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"बालकों की बोल-चाल" (गीता प्रेस) पुस्तक से साभार · संकलन: अजय कुमार मिश्र

सात्विकम् चैनल

देखें, सुनें, समझें

हर लेख का वीडियो रूप। श्लोकों का पाठ, कथा और गर्गाचार्य जी का प्रवचन।

श्री अर्जुन प्रसाद बस्तौला जी
सत्यम्
शिवम्
सुन्दरम्
मार्गदर्शक
संहिता शास्त्री गर्गाचार्य

श्री अर्जुन प्रसाद बस्तौला जी

ऋषि पंचमी का पर्व अपने ऋषियों को स्मरण करने का एक पावन दिन है। इसी दिन हम उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं। हर कल्प के सप्तर्षि कल्प भर हमारा मार्गदर्शन करते रहते हैं।ऋषि पंचमी पर गर्गाचार्य जी का कथन
सात्विकम् वेलफेयर फाउंडेशनसात्विक जीवनस्वस्थ समाजसमृद्ध भारत
लेखक व सहयोगी
अजय कुमार मिश्रनेशनल कोऑर्डिनेटर, सात्विकम वेल्फेयर फाउंडेशन · नई दिल्ली
नरेंद्र कुमार शर्मावरिष्ठ उपसंपादक, विचारक
अमरीश मनीष शुक्ललेखक · प्रयागराज
चंद्रकला पाडियालेखिका
सरोज बास्तोला 'जीवनामृत'लेखन सहयोगी

गुरुकुल का नाम सुझाएँ

भारत के गुरुकुल श्रृंखला के लिए। सात्विकम् टीम जानकारी की पुष्टि करके सूची में जोड़ेगी।

भविष्य के संत: नाम सुझाएँ

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