महामृत्युंजय मंत्र को लोग पूजा की थाली का मंत्र समझते रहे, जबकि यह इंसान के जेनेटिक आर्किटेक्चर का “मास्टर रीबूट कमांड” था। इस ऋचा के एक-एक शब्द को देखिए, कैसे यह शरीर के डीएनए को झकझोरता है।
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
(ऋग्वेद 7.49.12)
इस लेख में
- नब्ज की उल्टी गिनती और जीवन का रहस्य
- ऋषियों की दृष्टि में श्वास और ब्रह्मांड
- महाभारत में शुक्राचार्य की संजीवनी
- मंत्र या बायो-क्वांटम इंजीनियरिंग?
- मंत्र के प्रत्येक शब्द का विज्ञान
- नाम की ध्वनि और 33 अक्षरों का महाकोड
- वैदिक छंद और प्रकृति की गुप्त तिजोरी
- बायो-फोटॉन्स और ‘सुगन्धिं’ की रक्षा
- डीएनए की सफाई – मृत्यु कमांड
- वेगस नर्व और दिल की धड़कन
- कच और संजीवनी – न्यूरो-इलेक्ट्रिक ट्रांसफर
- यह ऋग्वेद है – अंधविश्वास नहीं, विज्ञान
- काल के पार की चेतना
- अंतिम संदेश
- समापन

