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वेद, विज्ञान व इतिहास

ऋग्वेद और विज्ञान

अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज

महामृत्युंजय मंत्र को लोग पूजा की थाली का मंत्र समझते रहे, जबकि यह इंसान के जेनेटिक आर्किटेक्चर का “मास्टर रीबूट कमांड” था। इस ऋचा के एक-एक शब्द को देखिए, कैसे यह शरीर के डीएनए को झकझोरता है।

त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्।
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्।।
(ऋग्वेद 7.49.12)

इस लेख में

  • नब्ज की उल्टी गिनती और जीवन का रहस्य
  • ऋषियों की दृष्टि में श्वास और ब्रह्मांड
  • महाभारत में शुक्राचार्य की संजीवनी
  • मंत्र या बायो-क्वांटम इंजीनियरिंग?
  • मंत्र के प्रत्येक शब्द का विज्ञान
  • नाम की ध्वनि और 33 अक्षरों का महाकोड
  • वैदिक छंद और प्रकृति की गुप्त तिजोरी
  • बायो-फोटॉन्स और ‘सुगन्धिं’ की रक्षा
  • डीएनए की सफाई – मृत्यु कमांड
  • वेगस नर्व और दिल की धड़कन
  • कच और संजीवनी – न्यूरो-इलेक्ट्रिक ट्रांसफर
  • यह ऋग्वेद है – अंधविश्वास नहीं, विज्ञान
  • काल के पार की चेतना
  • अंतिम संदेश
  • समापन
ऋग्वेद और विज्ञान