अगर आप अयोध्या की पावन यात्रा पर हैं, तो सबसे पहले श्री सरयू माँ के दर्शन कर स्नान आदि से पवित्र हो कर श्री हनुमान गढ़ी के महाराज का दर्शन करें। महाराज जी की आज्ञा लेकर श्री राम लल्ला, श्री राम दरबार और सप्तर्षि मंदिर आदि का दर्शन करें। और एक जगह जाना बिल्कुल ना भूलें— श्री कनक भवन, जो श्री सीताराम जी का निज महल है, जहाँ आज भी वे भक्तों के लिए नित्य निवास करते हैं।
कनक भवन मंदिर का प्राचीन एवं आधुनिक इतिहास
‘कनक भवन’ त्रेतायुग में भगवान श्रीराम एवं माता सीता का रहने का सोने से मढ़ा हुआ महल था। द्वापर युग के शुरू में भगवान राम के बड़े पुत्र महाराज कुश ने इसे अपने पिताश्री की स्मृति में पुनः निर्माण कराया। द्वापर युग के मध्य में महाराज ऋषभ देव ने इसे फिर से बनवाया। द्वापर के अन्त में भगवान श्री कृष्ण यहाँ पधारे थे।
कलियुग में सर्वप्रथम महाराज विक्रमादित्य ने इसका निर्माण युधिष्ठिर सम्वत् 2431 में किया। फिर इसका विस्तार एवं मरम्मत महाराज समुद्रगुप्त ने विक्रम सम्वत् 444 में किया। दुर्भाग्यवश विक्रम सम्वत् 1084 में एस० सालारजंग ने इसे ध्वस्त कर दिया।
वर्तमान भव्य ‘कनक भवन मंदिर’ का निर्माण एवं प्राण प्रतिष्ठा ओरछा राज्य के नरेश एच० एच० महाराज सवाई महेन्द्र सर प्रताप सिंह जू देव, जी० सी० एस० आई०, जी० सी० आई० ई० की धर्मपत्नी महारानी वृषभान कुँवर ने विक्रम सम्वत् 1948 (सन 1891) वैशाख सुदी 6, गुरू पुष्य नक्षत्र में करवाया। मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीराम एवं माता सीता की 3 जोड़ी मूर्तियाँ हैं। दर्शनार्थी भक्त के दाहिने हाथ की तरफ वाली पहली जोड़ी मूर्तियाँ महारानी वृषभान कुँवर द्वारा स्थापित की गई हैं, दर्शनार्थी के बाएँ हाथ की तरफ वाली दूसरी जोड़ी मूर्तियाँ महाराज विक्रमादित्य के द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर की हैं, और इसके नीचे वाली तीसरी जोड़ी मूर्तियाँ भगवान श्री कृष्ण द्वारा प्रतिष्ठित की गई थीं।
श्री कनकबिहारी जी की आरती एवं दर्शन की समय-सारिणी
| ग्रीष्मकाल | शीतकाल |
|---|---|
| आरती प्रातः 8.00 बजे से 10.30 तक दर्शन | आरती प्रातः 9.00 बजे से 11.00 बजे तक दर्शन |
| शयन आरती दोपहर 11.30 | शयन आरती दोपहर 12.00 बजे |
| दर्शन सायंकाल 4.30 बजे से 6.30 बजे तक | दर्शन सायंकाल 4.00 बजे से 6.00 बजे तक |
| संध्या आरती 7.00 बजे से 8.30 बजे तक दर्शन | संध्या आरती 6.30 बजे से रात्रि 8.00 बजे तक दर्शन |
| शयन आरती रात्रि 9.30 बजे | शयन आरती रात्रि 9.00 बजे |
नोट– उपरोक्त समय-सारिणी विशेष उत्सव पर्व पर परिवर्तनशील है।

