इस वर्ष वामन जयंती 23 सितंबर को मनाई जा रही है।
वर्तमान कलियुग के लिए प्रथम मानव रूप में भगवान का अवतार वामन स्वरूप में हुआ। वामनरूपधारी विष्णु का स्तवन ऋग्वेद में की गई प्रथम एवं एकमात्र प्रार्थना है। ये वेद की उपादेयता का व्याख्यान है।
संहिता शास्त्री गर्गाचार्य श्री अर्जुन प्रसाद बस्तोला
इस लेख में
- वेदकृत वामनरूपधारी विष्णु का स्तवन: ऋग्वेद के प्रथम मण्डल के 22वें सूक्त (मन्त्र 16-21)
- सभी मन्त्रों का सविस्तार अर्थ
- वामन जयंती का महत्व
- पूजा-व्रत की विधि
छोटे रूप में भी अनंत की शक्ति, यही है वामन का संदेश

